वैद्य: Difference between revisions
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आयुर्वेद या अन्य पारम्परिक चिकित्साप्रणाली का अभ्यास करने वाले चिकित्सकों को वैद्य या वैद्यराज कहते हैं। 'वैद्य' का शाब्दिक अर्थ है, 'विद्या से युक्त'। आधुनिक 'डॉक्टर' इसका पर्याय है। अधिक अनुभवी वैद्यों को 'वैद्यराज' कहते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप के अपने निजी वैद्य हुआ करते थे जिन्हें 'राजवैद्य' कहते थे।
- भारत के कुछ भागों में 'वैद्य', 'बैद्य' या 'वैद्यन' कुलनाम भी है।
चरकसंहिता में दो प्रकार के वैद्य बताए गये हैं- (१) प्राणाभिसर वैद्य, तथा (२) रोगाभिसर वैद्य (चरकसंहिता अध्याय २९, अनुच्छेद ५)
वैद्य के गुण
- तत्त्वाधिगतशास्त्रार्थो दृष्टकर्मा स्वयंकृती।
- लघुहस्तः शुचिः शूरः सज्जोपस्करभेषजः॥ १९
- प्रत्युत्पन्नमतिर्धीमान् व्यवसायी विशारदः।
- सत्यधर्मपरो यश्च स भिषक् पाद उच्यते॥ २० (सुश्रुतसंहिता)
ठीक प्रकार से शास्त्र पढ़ा हुआ, ठीक प्रकार से शास्त्र का अर्थ समझा हुआ, छेदन स्नेहन आदि कर्मों को देखा एवं स्वयं किया हुआ, छेदन आदि शस्त्र-कर्मों में दक्ष हाथ वाला, बाहर एवं अन्दर से पवित्र (रज-तम रहित), शूर (विषाद रहित) , अग्रोपहरणीय अध्याय में वर्णित साज-सामान सहित, प्रत्युत्पन्नमति (उत्तम प्रतिभा-सूझ वाला), बुद्धिमान, व्यवसायी (उत्साहसम्पन्न), विशारद (पण्डित), सत्यनिष्ट, धर्मपरायण होना - ये सब वैद्य के लक्षण हैं।