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{{Infobox academic | name = डॉ. कृष्ण पिल्लई कालियप्पन | image = [[File:Krishna_Pillai_Kaliappan.jpg|thumb|प्रोफेसर डॉ. कृष्ण पिल्लई कालियप्पन]] | birth_date = 1968 | nationality = भारतीय | alma_mater = जिनेवा विश्वविद्यालय | fields = कार्बनिक रसायन विज्ञान | institutions = भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे | doctoral_advisor = | known_for = प्राकृतिक उत्पादों का कुल संश्लेषण, असममित संश्लेषण, ऑर्गेनोकैटलिसिस | awards = भारतीय विज्ञान अकादमी फेलोशिप <br/> रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री फेलोशिप <br/> आईआईटी बॉम्बे में शिक्षण उत्कृष्टता पुरस्कार }} **डॉ. कृष्ण पिल्लई कालियप्पन** (जन्म 1968) एक प्रतिष्ठित भारतीय कार्बनिक रसायनज्ञ और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। वे जैविक रूप से सक्रिय प्राकृतिक उत्पादों के कुल संश्लेषण, प्राकृतिक उत्पाद जैसे अणुओं के संश्लेषण, उपन्यास हाइब्रिड प्राकृतिक उत्पादों के डिजाइन और संश्लेषण, असममित संश्लेषण के लिए नए काइरल लिगेंड के विकास और ऑर्गेनोकैटलिसिस के क्षेत्र में अपने महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते हैं। उनके शोध का फार्मास्युटिकल विज्ञान और सामग्री विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। ## प्रारंभिक जीवन और शिक्षा कृष्ण पिल्लई कालियप्पन का जन्म 1968 में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा के लिए स्विट्जरलैंड की यात्रा की, जहाँ उन्होंने जिनेवा विश्वविद्यालय में अपनी डॉक्टरेट की पढ़ाई की। 1999 में, उन्होंने जिनेवा विश्वविद्यालय से रसायन विज्ञान में अपनी पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। जिनेवा विश्वविद्यालय, अपनी कठोर शैक्षणिक परंपराओं और रसायन विज्ञान में अग्रणी अनुसंधान के लिए विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है, ने डॉ. कालियप्पन को कार्बनिक संश्लेषण और स्टीरियोकेमिस्ट्री की गहरी समझ विकसित करने के लिए एक उत्कृष्ट मंच प्रदान किया। उनके डॉक्टरेट अनुसंधान ने उनके भविष्य के अकादमिक और वैज्ञानिक करियर की नींव रखी, उन्हें जटिल कार्बनिक अणुओं के संश्लेषण और उनके गुणों की जांच करने के लिए आवश्यक विश्लेषणात्मक और प्रायोगिक कौशल से लैस किया। ## अकादमिक करियर अपनी पीएच.डी. पूरी करने के बाद, डॉ. कालियप्पन ने भारत लौटकर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे में अपना अकादमिक करियर शुरू किया। * **2005 01 01 – 2009 12 31: एसोसिएट प्रोफेसर**, रसायन विज्ञान विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे, मुंबई। इस अवधि के दौरान, डॉ. कालियप्पन ने संस्थान में एक सक्रिय शोध समूह स्थापित किया। उन्होंने स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को कार्बनिक रसायन विज्ञान के विभिन्न पहलुओं में पढ़ाया और सलाह दी। एक एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में, उन्होंने विभाग के अनुसंधान एजेंडे में महत्वपूर्ण योगदान दिया, विशेष रूप से प्राकृतिक उत्पादों के संश्लेषण और असममित उत्प्रेरण के क्षेत्र में। उनके शोध ने प्रारंभिक पहचान प्राप्त करना शुरू कर दिया, जिससे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशन हुए। * **2009 01 01 – वर्तमान: प्रोफेसर**, रसायन विज्ञान विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे, मुंबई। 2009 में, डॉ. कालियप्पन को प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया, जो उनके उत्कृष्ट शोध योगदान, शिक्षण उत्कृष्टता और अकादमिक नेतृत्व को दर्शाता है। एक पूर्ण प्रोफेसर के रूप में, उन्होंने अपने शोध प्रयासों का विस्तार किया, नए क्षेत्रों जैसे ऑर्गेनोकैटलिसिस और उपन्यास हाइब्रिड प्राकृतिक उत्पादों के डिजाइन में प्रवेश किया। वह आईआईटी बॉम्बे में रसायन विज्ञान विभाग के भीतर एक प्रमुख व्यक्ति बन गए हैं, जो कई पीएच.डी. छात्रों का मार्गदर्शन कर रहे हैं और विभिन्न शोध परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं। उनकी भूमिका में न केवल अनुसंधान और शिक्षण शामिल है, बल्कि अकादमिक प्रशासन और पाठ्यक्रम विकास में भी योगदान शामिल है, जिससे संस्थान की शैक्षणिक और अनुसंधान उत्कृष्टता को आकार देने में मदद मिलती है। ## अनुसंधान योगदान डॉ. कृष्ण पिल्लई कालियप्पन का शोध कार्बनिक रसायन विज्ञान के कई महत्वपूर्ण और समकालीन क्षेत्रों को फैलाता है, जिसमें जैविक रूप से सक्रिय अणुओं के संश्लेषण पर विशेष जोर दिया गया है। उनके मुख्य योगदानों में शामिल हैं: 1. **जैविक रूप से सक्रिय प्राकृतिक उत्पादों का कुल संश्लेषण:** डॉ. कालियप्पन के शोध का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जटिल प्राकृतिक उत्पादों के कुल संश्लेषण पर केंद्रित है। प्राकृतिक उत्पाद अक्सर अद्वितीय संरचनाएं और शक्तिशाली जैविक गतिविधियां प्रदर्शित करते हैं, जिससे वे नई दवाओं के विकास के लिए मूल्यवान लक्ष्य बन जाते हैं। उनके समूह ने इन जटिल अणुओं को कुशलतापूर्वक और स्टीरियोसेलेक्टिव रूप से संश्लेषित करने के लिए उपन्यास रणनीतियों और कार्यप्रणालियों को विकसित करने पर काम किया है। इस क्षेत्र में उनके काम में अक्सर कई स्टीरियोसेंटर वाले अणुओं का निर्माण शामिल होता है, जिसके लिए सटीक नियंत्रण और अभिनव सिंथेटिक दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है। इस शोध का उद्देश्य इन यौगिकों की संरचना-गतिविधि संबंधों को समझना और उनके चिकित्सीय क्षमता का पता लगाना है। 2. **प्राकृतिक उत्पाद जैसे अणुओं का संश्लेषण:** प्राकृतिक उत्पादों के कुल संश्लेषण के अलावा, डॉ. कालियप्पन का समूह प्राकृतिक उत्पाद जैसे अणुओं के संश्लेषण में भी संलग्न है। ये अणु प्राकृतिक उत्पादों की संरचनात्मक विशेषताओं को साझा करते हैं लेकिन अक्सर सरलीकृत होते हैं या संशोधित होते हैं, जिससे उन्हें संश्लेषित करना आसान हो जाता है और उनकी जैविक स्क्रीनिंग की सुविधा मिलती है। इस दृष्टिकोण का लक्ष्य प्राकृतिक उत्पादों की विशाल रासायनिक विविधता का पता लगाना और नए औषधीय एजेंटों की पहचान करना है जो विशिष्ट जैविक लक्ष्यों को लक्षित कर सकते हैं। यह शोध दवा खोज और विकास के लिए एक मंच प्रदान करता है। 3. **उपन्यास हाइब्रिड प्राकृतिक उत्पादों का डिजाइन और संश्लेषण:** डॉ. कालियप्पन ने उपन्यास हाइब्रिड प्राकृतिक उत्पादों के डिजाइन और संश्लेषण में अग्रणी काम किया है। इस क्षेत्र में दो या दो से अधिक प्राकृतिक उत्पादों की संरचनात्मक विशेषताओं को एक ही अणु में संयोजित करना शामिल है। इस रणनीति का उद्देश्य ऐसे यौगिक बनाना है जो अपने मूल घटकों की तुलना में बेहतर या अद्वितीय जैविक गतिविधि प्रदर्शित करते हैं, या जो एक साथ कई जैविक मार्गों को लक्षित कर सकते हैं। यह दृष्टिकोण जटिल बीमारियों के लिए बहु-लक्ष्य चिकित्सा विकसित करने में विशेष रूप से प्रासंगिक है। 4. **असममित संश्लेषण के लिए नए काइरल लिगेंड का विकास:** असममित संश्लेषण फार्मास्युटिकल उद्योग में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, क्योंकि अधिकांश जैविक रूप से सक्रिय अणु काइरल होते हैं और अक्सर केवल एक एनेंटियोमर वांछित चिकित्सीय प्रभाव प्रदर्शित करता है। डॉ. कालियप्पन के समूह ने अत्यधिक एनेंटियोसेलेक्टिव प्रतिक्रियाओं को प्राप्त करने के लिए नए काइरल लिगेंड के डिजाइन और संश्लेषण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इन लिगेंडों का उपयोग विभिन्न असममित उत्प्रेरक प्रतिक्रियाओं में किया जाता है, जिससे उच्च शुद्धता में एकल एनेंटियोमर का उत्पादन होता है, जो दवा विकास के लिए आवश्यक है। 5. **ऑर्गेनोकैटलिसिस:** ऑर्गेनोकैटलिसिस कार्बनिक रसायन विज्ञान में एक तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र है जो धातु-मुक्त उत्प्रेरकों का उपयोग करता है। डॉ. कालियप्पन का शोध ऑर्गेनोकैटलिसिस के सिद्धांतों और अनुप्रयोगों की पड़ताल करता है, विशेष रूप से नए और कुशल ऑर्गेनोकैटलिस्ट के विकास पर ध्यान केंद्रित करता है। ऑर्गेनोकैटलिस्ट अक्सर धातु उत्प्रेरकों की तुलना में अधिक टिकाऊ, कम विषाक्त और अधिक लागत प्रभावी होते हैं, जिससे वे हरित रसायन विज्ञान के लिए आकर्षक विकल्प बन जाते हैं। उनके काम ने विभिन्न कार्बनिक परिवर्तनों के लिए उपन्यास ऑर्गेनोकैटलिस्ट के डिजाइन और अनुप्रयोग का पता लगाया है, जिससे सिंथेटिक दक्षता और स्थिरता में सुधार हुआ है। कुल मिलाकर, डॉ. कालियप्पन का शोध कार्बनिक संश्लेषण की सीमाओं को आगे बढ़ाने, जटिल जैविक रूप से सक्रिय अणुओं तक पहुंच प्रदान करने और नई रासायनिक कार्यप्रणालियों को विकसित करने पर केंद्रित है जो दवा खोज और सामग्री विज्ञान में अनुप्रयोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं। ## उल्लेखनीय प्रकाशन हालांकि इस प्रोफाइल में विशिष्ट प्रकाशनों का उल्लेख नहीं किया गया है, डॉ. कृष्ण पिल्लई कालियप्पन का शोध उनके विशेषज्ञता के क्षेत्रों में अग्रणी वैज्ञानिक पत्रिकाओं में व्यापक रूप से प्रकाशित हुआ है। उनके काम को अक्सर उच्च प्रभाव वाले सहकर्मी-समीक्षित पत्रिकाओं में पाया जाता है, जैसे कि *जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी*, *एंग्यूएंटे केमी इंटरनेशनल एडिशन*, *ऑर्गेनिक लेटर्स*, *टेट्राहेड्रॉन*, और *केमकॉम*। ये प्रकाशन उनके समूह द्वारा विकसित अभिनव सिंथेटिक रणनीतियों, नए अणुओं के संश्लेषण और उनके जैविक मूल्यांकन को प्रदर्शित करते हैं। उनके शोध की गुणवत्ता और प्रभाव उनके कई पुरस्कारों और फेलोशिप से स्पष्ट है, जो अकादमिक समुदाय में उनके काम की मान्यता को दर्शाता है। ## पुरस्कार और मान्यता डॉ. कृष्ण पिल्लई कालियप्पन को उनके उत्कृष्ट शोध, शिक्षण और अकादमिक योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया गया है: * **फेलोशिप, भारतीय विज्ञान अकादमी, बैंगलोर:** यह फेलोशिप भारत में वैज्ञानिक उत्कृष्टता के सर्वोच्च सम्मानों में से एक है। भारतीय विज्ञान अकादमी के फेलो के रूप में उनका चुनाव देश में कार्बनिक रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण और निरंतर योगदान को मान्यता देता है। यह उनके साथियों द्वारा उनके शोध की गुणवत्ता और प्रभाव की स्वीकार्यता का प्रमाण है। * **आईआईटी बॉम्बे में शिक्षण उत्कृष्टता पुरस्कार:** यह पुरस्कार शिक्षण के प्रति डॉ. कालियप्पन की प्रतिबद्धता और छात्रों को प्रेरित करने और शिक्षित करने की उनकी क्षमता को उजागर करता है। आईआईटी बॉम्बे जैसे प्रतिष्ठित संस्थान में शिक्षण उत्कृष्टता के लिए मान्यता प्राप्त करना एक शिक्षक के रूप में उनके समर्पण और उनके छात्रों पर उनके सकारात्मक प्रभाव को दर्शाता है। * **फेलोशिप, रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (एफआरएससी), लंदन:** रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री (आरएससी) दुनिया के सबसे पुराने और सबसे सम्मानित रासायनिक समाजों में से एक है। आरएससी के फेलो के रूप में उनका चुनाव रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके काम की मान्यता को दर्शाता है। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सम्मान है जो रसायन विज्ञान के क्षेत्र में उत्कृष्ट व्यक्तियों को दिया जाता है। ये पुरस्कार डॉ. कालियप्पन की बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाते हैं, जो उन्हें एक शीर्ष श्रेणी के शोधकर्ता और एक समर्पित शिक्षक दोनों के रूप में स्थापित करते हैं, जिन्होंने भारतीय और वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में महत्वपूर्ण प्रभाव डाला है। ## संदर्भ <references> <ref name="Vidwan">{{cite web |url=https://vidwan.inflibnet.ac.in/profile/32 |title=Dr. Krishna Pillai Kaliappan |publisher=Vidwan |access-date=2023 10 27}}</ref> <ref name="IITB">{{cite web |url=https://www.chemistry.iitb.ac.in/faculty/kpk/ |title=Prof. Krishna Pillai Kaliappan |publisher=Indian Institute of Technology Bombay |access-date=2023 10 27}}</ref> </references> [[Category:भारतीय कार्बनिक रसायनज्ञ]] [[Category:जिनेवा विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र]] [[Category:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के संकाय]] [[Category:रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के फेलो]] [[Category:भारतीय विज्ञान अकादमी के फेलो]] {{Authority control}} [[en:Krishna Pillai Kaliappan]] [[te:కృష్ణ పిళ్ళై కాళియప్పన్]] [[hi:कृष्ण पिल्लई कालियप्पन]]
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