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{{Infobox academic | name = डॉ. जगदीश अरोड़ा | image = [[File:Jagdish_Arora.jpg|thumb|डॉ. जगदीश अरोड़ा]] | birth_date = 1956 | nationality = भारतीय | alma_mater = [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] (एम.लिब.आई.एससी.)<br />[[राजस्थान विश्वविद्यालय]] (पीएच.डी.) | known_for = पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान, डिजिटल पुस्तकालय, ओपन एक्सेस, कंसोर्टिया, डिजिटल रिपॉजिटरी, लाइब्रेरी 2.0, यूनियन डेटाबेस | awards = आईएलए-कौला सर्वश्रेष्ठ लाइब्रेरियन पुरस्कार<br />युवा लाइब्रेरियन पुरस्कार<br />एसआईएस फेलोशिप | occupation = सलाहकार, पुस्तकालय एवं सूचना वैज्ञानिक | employer = राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) | website = [https://vidwan.inflibnet.ac.in/profile/1 vidwan.inflibnet.ac.in/profile/1] }} **डॉ. जगदीश अरोड़ा** (जन्म 1956) एक प्रतिष्ठित भारतीय पुस्तकालय एवं सूचना वैज्ञानिक हैं, जिन्हें भारत में पुस्तकालय और सूचना विज्ञान (एलआईएस) के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान, विशेष रूप से डिजिटल पुस्तकालयों, ओपन एक्सेस पहलों और पुस्तकालय कंसोर्टिया के विकास के लिए जाना जाता है। वर्तमान में, वे नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड (एनबीए) में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। डॉ. अरोड़ा ने अपने करियर के दौरान विभिन्न प्रमुख शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिसमें सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र (इन्फ्लिबनेट) के निदेशक के रूप में उनका लंबा कार्यकाल विशेष रूप से उल्लेखनीय है। ## प्रारंभिक जीवन और शिक्षा डॉ. जगदीश अरोड़ा का जन्म 1956 में हुआ था। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा भारत के दो प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों से प्राप्त की। 1977 में, उन्होंने [[दिल्ली विश्वविद्यालय]] से पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान में मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इंफॉर्मेशन साइंस (एम.लिब.आई.एससी.) की उपाधि प्राप्त की। यह डिग्री उन्हें पुस्तकालय प्रबंधन, सूचना संगठन और पुनर्प्राप्ति प्रणालियों की गहरी समझ प्रदान करने में सहायक रही, जिसने उनके भविष्य के करियर की नींव रखी। अपनी अकादमिक यात्रा को आगे बढ़ाते हुए, डॉ. अरोड़ा ने 1992 में [[राजस्थान विश्वविद्यालय]] से अपनी पीएच.डी. पूरी की। उनके डॉक्टरेट शोध कार्य ने उन्हें पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पहलुओं में गहन विशेषज्ञता हासिल करने में मदद की, जिससे वे इस क्षेत्र में एक अग्रणी विचारक और शोधकर्ता के रूप में उभरे। उनकी शिक्षा ने उन्हें पारंपरिक पुस्तकालय प्रथाओं के साथ-साथ उभरती हुई सूचना प्रौद्योगिकियों को समझने और लागू करने के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया। ## अकादमिक और व्यावसायिक करियर डॉ. जगदीश अरोड़ा का व्यावसायिक करियर 1983 में शुरू हुआ और तब से उन्होंने भारत के कई प्रमुख संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाई हैं, जिससे देश में पुस्तकालय और सूचना सेवाओं के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका पहला महत्वपूर्ण पद 1983 से 1991 तक [[राष्ट्रीय प्रतिरक्षा संस्थान]] (National Institute of Immunology), नई दिल्ली में पुस्तकालय-सह-प्रलेखन अधिकारी के रूप में था। इस भूमिका में, उन्होंने एक विशिष्ट वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान की सूचना आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपनी विशेषज्ञता का उपयोग किया, जो उन्हें वैज्ञानिक प्रलेखन और सूचना प्रबंधन में प्रारंभिक अनुभव प्रदान करता था। 1991 में, डॉ. अरोड़ा [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली]] (आईआईटी दिल्ली), नई दिल्ली में उप-पुस्तकालयाध्यक्ष के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 2002 तक इस पद पर कार्य किया। आईआईटी जैसे प्रमुख तकनीकी संस्थान में, उन्होंने पुस्तकालय सेवाओं को उन्नत करने और सूचना प्रौद्योगिकी को एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवधि में, उन्होंने पुस्तकालय स्वचालन और डिजिटल संसाधनों के प्रबंधन में महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त किया। 2002 में, उन्हें [[भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे]] (आईआईटी बॉम्बे), मुंबई के केंद्रीय पुस्तकालय में लाइब्रेरियन के रूप में नियुक्त किया गया। यह एक वर्ष का कार्यकाल (2002 से 2003 तक) उन्हें एक और शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थान में पुस्तकालय सेवाओं का नेतृत्व करने का अवसर प्रदान किया, जहाँ उन्होंने पुस्तकालय के संचालन और उपयोगकर्ता सेवाओं को सुव्यवस्थित करने पर ध्यान केंद्रित किया। 2003 में, डॉ. अरोड़ा आईआईटी दिल्ली लौट आए, इस बार केंद्रीय पुस्तकालय के लाइब्रेरियन के रूप में, जहाँ उन्होंने 2007 तक सेवा की। इस पद पर, उन्होंने आईआईटी दिल्ली के पुस्तकालय को एक अत्याधुनिक सूचना केंद्र में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो छात्रों, शोधकर्ताओं और संकाय सदस्यों की बढ़ती सूचना आवश्यकताओं को पूरा करता था। उन्होंने डिजिटल संसाधनों के अधिग्रहण, ई-जर्नल्स और डेटाबेस तक पहुंच प्रदान करने और पुस्तकालय के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने पर जोर दिया। डॉ. अरोड़ा के करियर का सबसे प्रभावशाली चरण 2007 से 2018 तक [[सूचना एवं पुस्तकालय नेटवर्क केंद्र]] (Information and Library Network Centre - इन्फ्लिबनेट), गांधीनगर के निदेशक के रूप में था। इन्फ्लिबनेट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का एक स्वायत्त अंतर-विश्वविद्यालय केंद्र है, जो भारतीय विश्वविद्यालयों में पुस्तकालयों के आधुनिकीकरण और नेटवर्किंग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित है। निदेशक के रूप में, डॉ. अरोड़ा ने कई राष्ट्रीय स्तर की पहलों का नेतृत्व किया, जिन्होंने भारत में अकादमिक और अनुसंधान परिदृश्य को बदल दिया। उनके नेतृत्व में, इन्फ्लिबनेट ने [[शोधगंगा]] (Shodhganga) जैसे प्रमुख कार्यक्रमों को विकसित और कार्यान्वित किया, जो भारतीय विश्वविद्यालयों के शोध प्रबंधों और लघु शोध प्रबंधों का एक डिजिटल भंडार है, जिससे ओपन एक्सेस को बढ़ावा मिला। उन्होंने [[एन-लिस्ट]] (N-LIST) कंसोर्टियम के विस्तार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने हजारों कॉलेजों को ई-संसाधनों तक पहुंच प्रदान की। इसके अतिरिक्त, [[विद्यान]] (Vidwan) विशेषज्ञ डेटाबेस और [[ई-पीजी पाठशाला]] (e-PG Pathshala) जैसे ई-कंटेंट पोर्टलों का विकास उनके कार्यकाल के दौरान हुआ, जिससे भारत में डिजिटल शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा मिला। उन्होंने [[इंडेस्ट-एआईसीटीई कंसोर्टियम]] (INDEST-AICTE Consortium) के माध्यम से ई-संसाधनों के साझाकरण और लागत-प्रभावशीलता को भी बढ़ावा दिया, जिससे भारतीय अकादमिक संस्थानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले शोध सामग्री तक पहुंच आसान हो गई। 2019 से, डॉ. जगदीश अरोड़ा नई दिल्ली स्थित [[राष्ट्रीय प्रत्यायन बोर्ड]] (National Board of Accreditation - एनबीए) में सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। एनबीए भारत में तकनीकी और व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए गुणवत्ता आश्वासन और प्रत्यायन के लिए जिम्मेदार है। इस भूमिका में, डॉ. अरोड़ा अपनी व्यापक एलआईएस विशेषज्ञता का उपयोग उच्च शिक्षा संस्थानों में पुस्तकालय और सूचना संसाधनों के मूल्यांकन और गुणवत्ता मानकों को स्थापित करने में करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि संस्थान छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए पर्याप्त और अद्यतन सूचना अवसंरचना प्रदान करें। ## अनुसंधान योगदान और विशेषज्ञता डॉ. जगदीश अरोड़ा ने पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण अनुसंधान योगदान दिए हैं और उनकी विशेषज्ञता कई प्रमुख क्षेत्रों में फैली हुई है: * **पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान (एलआईएस):** उन्होंने एलआईएस के सैद्धांतिक और व्यावहारिक दोनों पहलुओं में गहन ज्ञान और अनुभव प्रदर्शित किया है, जिसमें पुस्तकालय प्रबंधन, सूचना संगठन, सूचना पुनर्प्राप्ति और उपयोगकर्ता सेवाएं शामिल हैं। * **लाइब्रेरी 2.0:** डॉ. अरोड़ा ने पुस्तकालयों में वेब 2.0 प्रौद्योगिकियों और उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवाओं के एकीकरण की वकालत की है। इसमें सोशल मीडिया, ब्लॉग और विकी जैसे उपकरणों का उपयोग करके पुस्तकालय सेवाओं को अधिक इंटरैक्टिव और सहयोगी बनाना शामिल है, जिससे उपयोगकर्ता जुड़ाव बढ़ता है। * **यूनियन डेटाबेस:** उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर यूनियन डेटाबेस के निर्माण और प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इन्फ्लिबनेट में उनके काम ने भारतीय पुस्तकालयों के संसाधनों को एक साथ लाने और साझा करने के लिए एक केंद्रीकृत मंच बनाने में मदद की, जिससे संसाधनों की खोज और पहुंच में सुधार हुआ। * **डिजिटल रिपॉजिटरी:** डॉ. अरोड़ा डिजिटल रिपॉजिटरी के विकास और कार्यान्वयन के एक मजबूत समर्थक रहे हैं। शोधगंगा जैसी पहल के माध्यम से, उन्होंने भारतीय शोध प्रबंधों और लघु शोध प्रबंधों के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल भंडार स्थापित करने में मदद की, जिससे विद्वानों के कार्यों का दीर्घकालिक संरक्षण और व्यापक पहुंच सुनिश्चित हुई। * **डिजिटल पुस्तकालय:** उन्होंने भारत में डिजिटल पुस्तकालयों के विकास और प्रबंधन में अग्रणी भूमिका निभाई है। उनके प्रयासों ने अकादमिक संस्थानों को डिजिटल संसाधनों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करने, व्यवस्थित करने और वितरित करने में मदद की है, जिससे दूरस्थ शिक्षा और अनुसंधान को बढ़ावा मिला है। * **कंसोर्टिया:** डॉ. अरोड़ा ने पुस्तकालय कंसोर्टिया की अवधारणा को सफलतापूर्वक लागू किया है, विशेष रूप से इन्फ्लिबनेट में अपने कार्यकाल के दौरान। इंडेस्ट-एआईसीटीई और एन-लिस्ट जैसे कंसोर्टिया ने संस्थानों को ई-संसाधनों को सामूहिक रूप से खरीदने में सक्षम बनाया है, जिससे लागत कम हुई है और उच्च गुणवत्ता वाली विद्वानों की सामग्री तक पहुंच बढ़ी है। * **ओपन एक्सेस:** वे ओपन एक्सेस आंदोलन के एक प्रबल समर्थक रहे हैं, जिसका उद्देश्य शोध परिणामों को बिना किसी बाधा के सभी के लिए स्वतंत्र रूप से उपलब्ध कराना है। उन्होंने ओपन एक्सेस नीतियों को बढ़ावा देने और शोधगंगा जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से ओपन एक्सेस प्रकाशन को सुविधाजनक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसंधान और व्यावहारिक कार्य ने भारत में पुस्तकालय और सूचना सेवाओं के आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण पर गहरा प्रभाव डाला है, जिससे भारतीय अकादमिक समुदाय के लिए सूचना तक पहुंच में क्रांति आई है। ## उल्लेखनीय प्रकाशन हालांकि विशिष्ट प्रकाशनों का विवरण प्रदान नहीं किया गया है, डॉ. जगदीश अरोड़ा ने अपने व्यापक अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के क्षेत्र में कई शोध पत्र, लेख और संभवतः पुस्तकें लिखी हैं। उनके प्रकाशनों में संभवतः डिजिटल पुस्तकालयों के विकास, ओपन एक्सेस पहलों के कार्यान्वयन, पुस्तकालय कंसोर्टिया के प्रबंधन, और भारत में सूचना प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया होगा। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में अपने शोध प्रस्तुत किए हैं और प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित किया है, जिससे एलआईएस समुदाय में उनके विचारों और नवाचारों का प्रसार हुआ है। उनके लेखन ने भारत में पुस्तकालयों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, विशेष रूप से डिजिटल युग में सूचना सेवाओं के अनुकूलन के संबंध में। ## पुरस्कार और मान्यता डॉ. जगदीश अरोड़ा को पुस्तकालय और सूचना विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया है: * **आईएलए-कौला सर्वश्रेष्ठ लाइब्रेरियन पुरस्कार (ILA-Kaula Best Librarian Award):** उन्हें [[भारतीय पुस्तकालय संघ]] (Indian Library Association - ILA) द्वारा यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया गया है। यह पुरस्कार भारत में पुस्तकालय पेशेवरों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मानों में से एक है, जो पुस्तकालय सेवाओं और प्रबंधन में असाधारण नेतृत्व और नवाचार को मान्यता देता है। * **युवा लाइब्रेरियन पुरस्कार (Young Librarian Award):** उन्हें [[सतकाल]] (SATKAL), [[पंजाब विश्वविद्यालय]], चंडीगढ़ द्वारा युवा लाइब्रेरियन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह पुरस्कार उनके करियर के शुरुआती चरणों में उनकी प्रतिभा, समर्पण और पुस्तकालय विज्ञान के क्षेत्र में उनके संभावित प्रभाव को मान्यता देता है। * **एसआईएस फेलोशिप (SIS Fellowship):** उन्हें [[स्कूल ऑफ इंटरनेशनल सर्विस]] (School of International Service - SIS) द्वारा फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। यह फेलोशिप उनके विद्वत्तापूर्ण योगदान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनके काम की मान्यता को दर्शाती है। इन पुरस्कारों के अतिरिक्त, डॉ. अरोड़ा को विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित किया गया है और वे कई विशेषज्ञ समितियों और बोर्डों के सदस्य रहे हैं, जो एलआईएस समुदाय में उनके उच्च सम्मान और प्रभाव को दर्शाता है। ## संदर्भ <references> <ref name="Vidwan Profile">{{cite web |url=https://vidwan.inflibnet.ac.in/profile/1 |title=Dr. Jagdish Arora - Vidwan Profile |publisher=INFLIBNET Centre |access-date=2023-10-27 |language=en}}</ref> <ref name="NBA Advisor">{{cite web |url=https://www.nbaind.org/ |title=National Board of Accreditation - Official Website |publisher=National Board of Accreditation |access-date=2023-10-27 |language=en}}</ref> </references> [[Category:भारतीय लाइब्रेरियन]] [[Category:दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र]] [[Category:राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र]] [[Category:पुस्तकालय एवं सूचना वैज्ञानिक]] {{Authority control}} [[en:Jagdish Arora]] [[te:జగదీష్ అరోరా]] [[hi:जगदीश अरोड़ा]]
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